Alfred nobel biography in hindi, अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी और उनके सफलता के नियम

alfred nobel biography in hindi | अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी

दोस्तों अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल का जन्म 21 अक्तूबर, 1833 को स्वीडन के स्टॉकहोम में हुआ। अल्फ्रेड ने अपने घर पर रहकर विज्ञान, साहित्य, अर्थशास्त्र, रसायन एवं भौतिकी का अध्ययन किया और 17 वर्ष की उम्र में रूसी, फ्रेंच, जर्मन, अंग्रेजी आदि भाषाएँ धारा-प्रवाह बोलनी सीख लीं। 

उनके पिता ने केमिकल इंजीनियर बनाने के लिए उन्हें पेरिस भेजा।   इसके बाद वे अपने पिता के कारखाने में विस्फोटकों के, विशेषकर नाइट्रोग्लिसरीन के, अध्ययन में लग गए। उन्होंने डायनामाइट व बेलिस्टाइट नामक दो विस्फोटक का निर्माण किया। इन दोनों ही पदार्थों का उद्योग तथा युद्ध में भी विस्तृत रूप से उपयोग होने लगा।

 इससे नोबेल की आमदनी अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई। लेकिन उनका एकाकी जीवन रोगों से युद्ध करते बीता। उन्हें कभी शांति नसीब नहीं हुई। बाद में मानव-हित की आकांक्षा से प्रेरित होकर उन्होंने अपने धन का उपयोग एक ट्रस्ट स्थापित करके किया, जिससे ‘नोबेल पुरस्कार’ दिए जाते हैं। 

अल्फ्रेड नोबेल की मृत्यु के पश्चात स्वीडिश लोगो को 1886 में 10 december को अल्फ्रेड नोबेल की बसीयत के बारे में पता चला, जब इनकी बसीयत पढ़ी गई तो उसमें पाया गया कि अल्फ़्रेड नोबेल ने अपना सारा धन और मिलने बाली सारी बार्षिक आय को पुरुस्कारों के लिये मदद के रूप में दान कर दी। उन्होंने इस बसीयत मे कहा कि किसी भी देश का व्यक्ति नोवेल पुरुस्कार प्राप्त कर सकता है।

alfred nobel biography in hindi | अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी


अल्फ्रेड नोबेल के अनुसार, सफलता के दस नियम इस प्रकार हैं-

नियम 1. जीवन के उद्देश्य का सृजन 

अगर आप अपने जीवन का उद्देश्य नहीं ढूँढ़ पा रहे हैं तो उसका सृजन करना आपका कर्तव्य है। यदि आपके पास हजारों विचार हैं और केवल एक को आप सफल बना सकें तो संतुष्टि के लिए वह पर्याप्त है। जो मंजिलों को पाने की चाहत रखते हैं, वो समंदरों पर भी पत्थरों के पुल बना देते हैं। 


नियम 2. जो आप सोचते हैं, उसके लिए आप जिम्मेदार हैं

 आप शायद यह विश्वास करते होंगे कि जो आप करते हैं, आप उसके लिए जिम्मेदार हैं, न कि आप जो सोचते हैं, उसके लिए; लेकिन सच्चाई यह है कि जो आप सोचते हैं, आप उसके लिए जिम्मेदार हैं; क्योंकि आप उसी स्तर का चुनाव करते हैं। जो आप सोचते हैं, वो ही आप करते हैं। आपके जीवन में दो प्राथमिक चुनाव हैं—परिस्थितियाँ जैसी हैं, वैसी स्वीकार कर ली जाएँ या उन्हें बदलने की जिम्मेदारी ली जाए! 


नियम 3. इनसान की तलाश

 जीवन में अनुभवों से सीखकर खुद को बदलने की जरूरत होती है। अगर हम बदलना बंद कर देते हैं तो एक ही जगह रुक जाते हैं। जो बदलता है, वही आगे बढ़ता है। अगर आप उस इनसान की तलाश कर रहे हैं, जो आपकी जिंदगी बदलेगा तो आईने में देख लें। 


 नियम 4. खुशियों की जिम्मेदारी स्वयं लें 

 एक दिल को प्यार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है, जबकि पेट को भोजन के लिए मजबूर किया जा सकता है। संतुलित रहें, अपनी खुशियों की जिम्मेदारी स्वयं लें। लोगों से या चीजों से यह अपेक्षा न रखें कि वे आपके लिए खुशियाँ लेकर आएँगे। आप निराश हो सकते हैं।


 नियम 5. कर्म 

 कर्म की जिम्मेदारी-उपलब्धियों का श्रेय नहीं अकेले शुभकामनाएँ शांति सुनिश्चित नहीं करेंगी कुछ पुख्ता भी करना चाहिए। आपको व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेनी होगी। आप परिस्थितियाँ नहीं बदल सकते; मौसम या हवाओं का रुख नहीं बदल सकते; लेकिन आप अपने आप को बदल सकते हैं। आपको अपने कर्म की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, लेकिन अपनी उपलब्धियों का श्रेय नहीं। 
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 नियम 6. जीवन की जिम्मेदारी

  चरित्र वह नहीं है कि जिसके साथ आप पैदा हुए हैं और बदल नहीं सकते, जैसे कि आपकी उँगलियों के निशान। ये वो है, जिसके साथ आप पैदा नहीं हुए हैं और जिसे बनाने की जिम्मेदारी आपको लेनी चाहिए। जहाँ आप खड़े हैं, वहाँ होने के लिए जिम्मेदारी लेना आपको वहाँ जाने के लिए शक्ति देता है, जहाँ आप जाना चाहते हैं। जितनी जल्दी आप अपने जीवन की जिम्मेदारी लेंगे, उतनी जल्दी आप सफल होंगे। 


  नियम 7. शांति जरूरी 

  जिस दिन दो सेनाएँ परस्पर एक-दूसरे का सर्वनाश कर देंगी, शायद तब सभी सभ्य देश डरकर फिर से साथ मिल जाएँगे और अपने सैनिकों को हटा देंगे। तरक्की के लिए शांति जरूरी है।

  नियम 8. मदद 

  जो आदमी कार्य करने में सक्षम हो, उसके लिए कुछ भी न छोड़ें, क्योंकि इस प्रकार वह अपने कार्य से विमुख होकर नकारा हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, सपने देखनेवालों की मदद करें, क्योंकि उन्हें जीवन में आगे बढ़ना मुश्किल लगता है। 

  नियम 9. युद्ध

   युद्ध के समर्थक खूब इसके समर्थन में लिखेंगे; लेकिन युद्ध तभी तक जारी रहेंगे, जब तक कि परिस्थितियों के बल उन्हें असंभव नहीं बना देते। आप भी एक बल बन सकते हैं। 


   नियम 10. प्रकृति-शिक्षक

    प्रकृति मनुष्य की शिक्षक है। वह अपनी खोज के लिए अपने खजाने को उजागर करती है, अपनी आँखों को खोलती है, अपने दिमाग को रोशन करती है और अपने दिल को शुद्ध करती है। एक प्रभाव सभी स्थलों और उसके अस्तित्व की आवाज के साथ साँस लेता प्रतीत होता है।

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